Ziyarat E Nahiya In Hindi Jun 2026
: इसमें इमाम (अ.स.) कहते हैं, "अगर मैं उस समय आपकी सहायता के लिए मौजूद नहीं था, तो मैं आपके लिए सुबह-शाम रोऊंगा और आँसुओं के बदले खून बहाऊंगा"
मुहर्रम-उल-हराम का महीना आते ही कर्बला के मातम की लहर पूरी दुनिया में दौड़ जाती है। हर शिया-ए-अली (अ.स.) इस दौरान इमाम हुसैन (अ.स.) के मजलिसों में रोता है और उनके दर्द को समझने की कोशिश करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसी ज़ियारत (पवित्र प्रार्थना) भी है, जिसे खुद चौथे इमाम, इमाम ज़ैन-उल-आबिदीन (अ.स.) ने कर्बला के मैदान में मौजूद न होते हुए भी पढ़ा था? यही है "ज़ियारत-ए-नाहिया" । ziyarat e nahiya in hindi
अल्लाहुम्म इननी अना ज़ाइलुक, फअ्ज़ल ज़ियाराती, व अना आरीफु बिलवफा, लिय वलातुक। : इसमें इमाम (अ
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